Sunday, April 24, 2011

परिचय



डा० जगदीश व्योम

जन्म- 01 मई 1960 को फर्रुखाबाद [उ०प्र०] के शम्भूनगला में जन्म
शिक्षा-  लखनऊ विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में पी-एच० डी०
प्रकाशन- कविता, कहानी, बालकहानी, शोध लेख, नवगीत, हाइकु, व्यंग्य आदि का पत्र-पत्रिकाओं में तथा इंटरनेट पर अनवरत प्रकाशन।

प्रसारण- सहारा समय द्वारा साक्षात्कार प्रसारित, लोक सभा टी.व्ही. द्वारा हाइकु कविता पर लम्बा साक्षात्कार प्रसारित,  दिल्ली दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल से कविताएँ तथा परिचर्चा का प्रसारण, आकाशवाणी के दिल्ली, सूरतगढ़, मथुरा, ग्वालियर, भोपाल आदि केन्द्रों से हाइकु, कहानी बालकहानी, कविता, वार्ता, ब्रज नवकथा आदि का प्रसारण।

कृतियाँ-
इन्द्र धनुष, भोर के स्वर (काव्य संग्रह), कन्नौजी लोकगाथाओं का सर्वेक्षण और विश्लेषण (शोध ग्रंथ), लोकोक्ति एवं मुहावरा कोश, नन्हा बलिदानी, डब्बू की डिबिया (बाल उपन्यास), सगुनी का सपना (बाल कहानी संग्रह)

संपादन-
भारतीय बच्चों के हाइकु,
नवगीत-2013,
आजादी के आस पास,
कहानियों का कुनबा (कहानी संग्रह),
फुलवारी’ (बालगीत संकलन),
बाल प्रतिबिम्ब’ (पत्रिका)
हाइकु दर्पण ( हाइकु पत्रिका)

 हिन्दी साहित्य, हाइकु कोश, हाइकु संसार, हाइकु दर्पण, नवगीत (वेब पत्रिकाएँ)


विशेष-
प्रकाशिनी हिन्दी निधि कन्नौज, श्री मधुर स्मृति बाल साहित्य पुरस्कार 1999, शकुन्तला सिरोठिया बाल साहित्य पुरस्कार,
भारतीय बाल कल्याण संस्थान कानपुर, अनुभूति सम्मान, माइक्रोसाफ्ट भाषा पुरस्कार, माधव अलंकरण आदि सम्मान।

सम्पर्क सूत्र-
डा० जगदीश व्योम
बी-12ए 58ए
धवलगिरि, सेक्टर-34
नोएडा-201301
email-
jagdishvyom@gmail.com
www.vyomkepar.blogspot.in

11 comments:

सुनील गज्जाणी said...

namaskar !
aap ki blog pe pehli baar aaya aur achcha laga .
saadar

Kanishka Kashyap said...

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टीम ब्लॉगप्रहरी

angelee said...

Aadarniye Dr Sahib,
Aap ki kahani acchi lagi,
angelee

राजीव थेपड़ा said...

बहुत उत्प्रेरक कथा है.......!!

vandana said...

सहज प्रवाह युक्त लघुकथा बहुत अच्छी लगी

श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’ said...

..... .. और उसने मन ही मन एक निर्णय ले लिया...... ऐसा निर्णय जो उसके स्वाभिमान से जुड़ा था, जो उसके सम्मान से जुड़ा था और जो समूची नारी जाति के सशक्तीकरण, सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक था।

आदरणीय अग्रज कथा के उपरोक्त कथ्य के चारो ओर मेरा चिन्तन परिक्रमा करता रहता है।
...... सुपर डैड के नाम से मेरी कहानी भी इसी उद्देश्य को समर्पित है।

श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’ said...

..... .. और उसने मन ही मन एक निर्णय ले लिया...... ऐसा निर्णय जो उसके स्वाभिमान से जुड़ा था, जो उसके सम्मान से जुड़ा था और जो समूची नारी जाति के सशक्तीकरण, सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक था।

आदरणीय अग्रज कथा के उपरोक्त कथ्य के चारो ओर मेरा चिन्तन परिक्रमा करता रहता है।
...... सुपर डैड के नाम से मेरी कहानी भी इसी उद्देश्य को समर्पित है।

ओमप्रकाश यती said...

भाई व्योम जी,
एक प्रासंगिक और प्रेरणास्पद लघु कथा के लिए बार-बार बधाई.....ओमप्रकाश यती

ARUN RUHELA said...

आज के समय कि यही मांग है. जो गलत करे उसे सुधार करने क एक अवसर मिलना ही चाहिए.. और यदि सुधार नहीं होता तो ऐसे में दंड ही एक मात्र विकल्प है.

ऋषभ शुक्ला said...

आपका ब्लॉग मुझे बहुत अच्छा लगा, और यहाँ आकर मुझे एक अच्छे ब्लॉग को फॉलो करने का अवसर मिला. मैं भी ब्लॉग लिखता हूँ, और हमेशा अच्छा लिखने की कोशिस करता हूँ. कृपया मेरे ब्लॉग पर भी आये और मेरा मार्गदर्शन करें.

http://hindikavitamanch.blogspot.in/
http://kahaniyadilse.blogspot.in/

Pankaj Dwivedi said...

Dear Dr. Vyom,

I am Pankaj Dwivedi. I work as a lecturer in Central Institute of Indian Language, Mysore. I am working on the Phonology of Kanauji. I have come to know that you have done your Ph.D. in Kanauji folk literature. I will be highly obliged if you may please send the copy of your dissertation.

I will duly cite and acknowledge your help in my academic work.


Kind regards,

Pankaj